
बाधार में ना तो चापाकल था और ना पंपसेट ही मौजूद था। किसी तरह लोग पास के पेड़ों से हरी पत्तियों वाले टहनियों को तोड़ लिया। इसके बाद टहनियों से पीट-पीट कर आग बुझाने की कोशिशें शुरू हुई। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। फसल के साथ कई किसानों के अरमान भी जल गए। यह देख पीड़ित महिला किसान मौके पर ही बिलखने लगीं।
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